गणेश-अष्टकम-

Ganesh Ashtakam Lyrics | गणेश अष्टकम पाठ और इसके फायदे

गणेश अष्टकम (Ganesh Ashtakam) एक विशेष प्रकार की भक्ति प्रार्थना है जो भगवान गणेश की महिमा और प्रशंसा को समर्पित करती है। इस अष्टकम का अर्थ है “आठ,” और इसमें भगवान गणेश की आठ विशेषताओं का वर्णन है, जो विभिन्न प्रकार के बाधाओं को दूर करने वाले हैं। इसका पाठ भगवान गणेश के शक्तिशाली हिंदू मंत्र होता है, जो जीवन के सभी क्षेत्रों में बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।

यह अष्टकम हिन्दू भक्ति का मूल मंत्र है, जो भगवान गणेश या विनायक, ज्ञान के देवता और सभी कठिनाइयों को दूर करने वाले को समर्पित है। रोज़ाना गणेश अष्टकम का पाठ करने या गाने से व्यक्ति को उनके जीवन में सफलता मिलती है और वे अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सशक्त होते हैं।

Ganesh Ashtakam Lyrics in Hindi/Sanskrit | गणेश अष्टकम् हिंदी/ संस्कृत में

सर्वे उचुः ।
यतोऽनंतशक्तेरनंताश्च जीवा
यतो निर्गुणादप्रमेया गुणास्ते ।
यतो भाति सर्वं त्रिधा भेदभिन्नं
सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ 1 ॥

यतश्चाविरासीज्जगत्सर्वमेत-
-त्तथाब्जासनो विश्वगो विश्वगोप्ता ।
तथेंद्रादयो देवसंघा मनुष्याः
सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ 2 ॥

यतो वह्निभानू भवो भूर्जलं च
यतः सागराश्चंद्रमा व्योम वायुः ।
यतः स्थावरा जंगमा वृक्षसंघाः
सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ 3 ॥

यतो दानवाः किन्नरा यक्षसंघा
यतश्चारणा वारणाः श्वापदाश्च ।
यतः पक्षिकीटा यतो वीरुधश्च
सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ 4 ॥

यतो बुद्धिरज्ञाननाशो मुमुक्षो-
-र्यतः संपदो भक्तसंतोषदाः स्युः ।
यतो विघ्ननाशो यतः कार्यसिद्धिः
सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ 5 ॥

यतः पुत्रसंपद्यतो वांछितार्थो
यतोऽभक्तविघ्नास्तथाऽनेकरूपाः ।
यतः शोकमोहौ यतः काम एव
सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ 6 ॥

यतोऽनंतशक्तिः स शेषो बभूव
धराधारणेऽनेकरूपे च शक्तः ।
यतोऽनेकधा स्वर्गलोका हि नाना
सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ 7 ॥

यतो वेदवाचो विकुंठा मनोभिः
सदा नेति नेतीति यत्ता गृणंति ।
परब्रह्मरूपं चिदानंदभूतं
सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ 8 ॥

श्रीगणेश उवाच ।
पुनरूचे गणाधीशः स्तोत्रमेतत्पठेन्नरः ।
त्रिसंध्यं त्रिदिनं तस्य सर्वकार्यं भविष्यति ॥ 9 ॥

यो जपेदष्टदिवसं श्लोकाष्टकमिदं शुभम् ।
अष्टवारं चतुर्थ्यां तु सोऽष्टसिद्धीरवाप्नुयात् ॥ 10 ॥

यः पठेन्मासमात्रं तु दशवारं दिने दिने ।
स मोचयेद्बंधगतं राजवध्यं न संशयः ॥ 11 ॥

विद्याकामो लभेद्विद्यां पुत्रार्थी पुत्रमाप्नुयात् ।
वांछिताँल्लभते सर्वानेकविंशतिवारतः ॥ 12 ॥

यो जपेत्परया भक्त्या गजाननपरो नरः ।
एवमुक्त्वा ततो देवश्चांतर्धानं गतः प्रभुः ॥ 13 ॥

इति श्रीगणेशपुराणे उपासनाखंडे श्रीगणेशाष्टकम् ।

Ganesh Ashtakam Lyrics in English

sarvē uchuḥ ।
yatō’nantaśaktēranantāścha jīvā
yatō nirguṇādapramēyā guṇāstē ।
yatō bhāti sarvaṃ tridhā bhēdabhinnaṃ
sadā taṃ gaṇēśaṃ namāmō bhajāmaḥ ॥ 1 ॥

yataśchāvirāsījjagatsarvamēta-
-ttathābjāsanō viśvagō viśvagōptā ।
tathēndrādayō dēvasaṅghā manuṣyāḥ
sadā taṃ gaṇēśaṃ namāmō bhajāmaḥ ॥ 2 ॥

yatō vahnibhānū bhavō bhūrjalaṃ cha
yataḥ sāgarāśchandramā vyōma vāyuḥ ।
yataḥ sthāvarā jaṅgamā vṛkṣasaṅghāḥ
sadā taṃ gaṇēśaṃ namāmō bhajāmaḥ ॥ 3 ॥

yatō dānavāḥ kinnarā yakṣasaṅghā
yataśchāraṇā vāraṇāḥ śvāpadāścha ।
yataḥ pakṣikīṭā yatō vīrudhaścha
sadā taṃ gaṇēśaṃ namāmō bhajāmaḥ ॥ 4 ॥

yatō buddhirajñānanāśō mumukṣō-
-ryataḥ sampadō bhaktasantōṣadāḥ syuḥ ।
yatō vighnanāśō yataḥ kāryasiddhiḥ
sadā taṃ gaṇēśaṃ namāmō bhajāmaḥ ॥ 5 ॥

yataḥ putrasampadyatō vāñChitārthō
yatō’bhaktavighnāstathā’nēkarūpāḥ ।
yataḥ śōkamōhau yataḥ kāma ēva
sadā taṃ gaṇēśaṃ namāmō bhajāmaḥ ॥ 6 ॥

yatō’nantaśaktiḥ sa śēṣō babhūva
dharādhāraṇē’nēkarūpē cha śaktaḥ ।
yatō’nēkadhā svargalōkā hi nānā
sadā taṃ gaṇēśaṃ namāmō bhajāmaḥ ॥ 7 ॥

yatō vēdavāchō vikuṇṭhā manōbhiḥ
sadā nēti nētīti yattā gṛṇanti ।
parabrahmarūpaṃ chidānandabhūtaṃ
sadā taṃ gaṇēśaṃ namāmō bhajāmaḥ ॥ 8 ॥

śrīgaṇēśa uvācha ।
punarūchē gaṇādhīśaḥ stōtramētatpaṭhēnnaraḥ ।
trisandhyaṃ tridinaṃ tasya sarvakāryaṃ bhaviṣyati ॥ 9 ॥

yō japēdaṣṭadivasaṃ ślōkāṣṭakamidaṃ śubham ।
aṣṭavāraṃ chaturthyāṃ tu sō’ṣṭasiddhīravāpnuyāt ॥ 10 ॥

yaḥ paṭhēnmāsamātraṃ tu daśavāraṃ dinē dinē ।
sa mōchayēdbandhagataṃ rājavadhyaṃ na saṃśayaḥ ॥ 11 ॥

vidyākāmō labhēdvidyāṃ putrārthī putramāpnuyāt ।
vāñChitāँllabhatē sarvānēkaviṃśativārataḥ ॥ 12 ॥

yō japētparayā bhaktyā gajānanaparō naraḥ ।
ēvamuktvā tatō dēvaśchāntardhānaṃ gataḥ prabhuḥ ॥ 13 ॥

iti śrīgaṇēśapurāṇē upāsanākhaṇḍē śrīgaṇēśāṣṭakam ।

गणेश अष्टकम (Ganesh Ashtakam) का पाठ करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है और भक्त को उनके जीवन में शुभ गतिविधियों, समृद्धि, शांति, और सफलता की प्राप्ति होती है। यह अष्टकम भक्तों को उनके देवता के प्रति श्रद्धा और विश्वास को मजबूत करता है और उन्हें उनके आदर्शों और शक्तियों का महत्व समझने में मदद करता है।

गणेश अष्टकम का पाठ करने से भक्त गणेश भगवान की कृपा प्राप्त करते हैं और उनके जीवन को सफलता, समृद्धि, शांति, और समृद्धि की ओर बढ़ाते हैं। इस अष्टकम का पाठ करने से भक्तों का मन शांत हो जाता है और उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा का अहसास होता है।

गणेश अष्टकम का पाठ करने से भक्त अपनी आदर्शों के साथ और भगवान गणेश के प्रति अपनी श्रद्धा को मजबूत करते हैं और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सफलता और पूर्णता की ओर बढ़ाते हैं।

गणेश अष्टकम का जाप किसे करना चाहिए:

गणेश अष्टकम का जाप करने के लिए यह सारे व्यक्तिगत स्थितियों में फायदेमंद हो सकता है:

सफल हो या असफल: चाहे आप सफल हों या असफल, गणेश अष्टकम का जाप करने से सभी को रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति के लिए इसका आदान-प्रदान करना चाहिए।

कार्यों में परेशानी: जब किसी कार्य को पूरा करने में परेशानी आ रही हो, तो इस मंत्र का जाप आपको समर्थन प्रदान कर सकता है।

गणेश अष्टकम के लाभ/फायदे

गणेश अष्टकम का पाठ करने के कई लाभ होते हैं, जो भक्तों को उनके जीवन में सकारात्मक परिणाम प्रदान करते हैं:

सफलता की प्राप्ति: गणेश अष्टकम का जाप करने से व्यक्ति को सफलता मिलती है। यह उनके प्रत्येक प्रयासों में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है.

नए उद्यमों में सफलता: इस अष्टकम का पाठ करने से नए उद्यमों में सफलता आती है और व्यक्ति के व्यवसाय में वृद्धि होती है.

ज्ञान और सफलता की शक्ति: गणेश अष्टकम व्यक्ति को ज्ञान और सफलता की शक्ति प्रदान करता है, जिससे वे अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं.

ऊर्जा और शक्ति: इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को ऊर्जा और शक्ति की आपूर्ति होती है, जो उनके दैनिक जीवन में मदद करती है.

सकारात्मक परिणाम: जब भक्त गणेश अष्टकम का पाठ सच्ची श्रद्धा के साथ करते हैं, तो उन्हें सकारात्मक परिणाम मिलते हैं, जो उनके जीवन को सुखमय और सफल बनाते हैं.

परीक्षणों और परेशानियों का समाधान: गणेश अष्टकम का पाठ करने से व्यक्ति के सामने आने वाली परीक्षणों और परेशानियों का समाधान होता है, और वह उन्हें सफलता की ओर अग्रसर करते हैं.

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